दुआ

दुआ

बस एक दुआ सुन ले मालिक बेआब रहूँ बर्बाद रहूँ.


ज़ख्म खा कर हसने को मैं ज़ुल्म बड़ा ही समझता हूँ,

मैं चीखके पुकार सकूं, मैं कमज़ोर रहूँ आज़ाद रहूँ.


हर फ़िक्र से मुझको लगता है जान अभी भी बाकी है,

मैं अब मरने के ही बाद जियूं, मरने के ही बाद रहूँ.


और ढूंढकर मारेंगे मेरे चाहनेवाले पत्थर मुझको,

बड़ा बदनाम है ये नाम मेरा, इसी नाम से सबको याद रहूँ.


मेरे टूटने की गुजारिश कईयों की ख्वाहिश है कबसे,

यूँ ही किसी की ख्वाहिश रहूँ, किसी दिल की फरियाद रहूँ.


--' अतुल '


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13 Responses

  1. SWAPN Says:

    blog jagat men swagat.

    achchi rachna hai.


  2. swagat hai aapka...........




  3. सुंदर रचना शब्द नहीं है तारीफ के लिए मेरे पास



  4. gargi gupta Says:

    आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
    लिखते रहिये
    चिटठा जगत मे आप का स्वागत है
    गार्गी



  5. shama Says:

    Bohot sunadar..tahe dilse keh rahee hun.." kamzor rehna behtar hai, banisbat ke par tantr me rehna .."

    Tootee maghaiyya hi hee theek, gar usme apna raaj ho...kya karne mehel do mehle, gar saans lena bhi mushkil ho..!


  6. shama Says:

    "sandar" likhna chaah rahee thee...kshama prarthi hun, galat wartanee ke liye..

    Gar ho sake to "word verification" zaroor hata den...tippanee dene me suvidha hogee..


  7. हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत है......


  8. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।


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