कोई आने को है

दस्तक है, कोई आने को है.

वो शहर यहाँ उजड़ा था कभी,
वहीं कोई बस्ती बसाने को है.

मैं ही था राह में ताकता ही रहा,
राह वहीँ से  मुड जाने को है.

तोड़ हर कसम, आज उनके पास,
कोई वायदा निभाने को है.

हद से जियादा मांग लिया आपने,
मेरा सब्र शायद टूट जाने को है.

' अतुल '
3 Responses
  1. mahesh Says:

    saadgi.. sundar


  2. anand Says:

    badal thode hi the aankhon mein mere
    mausam rahte wahi baras jaane ko hai.


  3. prateek Says:

    bilkul nishaane par..


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