ग़ज़ल: ठहर जाइये

अभी हौसला है, चले आइये ,
अभी जाँ है बाकी ठहर जाइये |

मुहब्बत को जितना भी नासूर समझो,
ये ज़ख्म है मीठा कुरेदे जाइये |

बहुत सी वफ़ा है आँखों में मेरी,
हर खता की सज़ा मुझको दे जाइये |

बहारों को भी इतना गुमाँ न होगा,
आये हैं तो ज़रा देर रुक जाइये |

शमा है अधूरी मैं आधा जला हूँ,
धीरे धीरे हमको जलाते जाइये |

नहीं जानता बिन तेरे मैं क्या हूँ,
मेरे बिन तू क्या है ये फरमाइए |

'अतुल'


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