ग़ज़ल : मांग लें

तेरी बेवफाई के बदले क्यूँ न बेखुदी मांग लें,
ज़िन्दगी मुबारक तुझे, हम ख़ुदकुशी मांग लें |

तोड़ दे तू दिल हजारों, गुल बिखरादे तू कई,
चल के उनपे कांटो से ही, हम हर ख़ुशी मांग लें |

तेरी महफ़िल न मिली तो सावन भी आया नहीं,
सोचता हूँ थोड़ी मुहब्बत, पतझड़ से ही मांग लें |   

तेरा सर था मेरे कंधे, दिल किसी की बांह में,
ख्याल आया फिर, क्यूँ न तेरी दोस्ती मांग लें |

मेरी मय्यत पे तशरीफ़ जो लाये तो सोचा,
खुदा से हम काफिर क्यूँ न, ज़िन्दगी मांग लें |

- 'अतुल'




2 Responses
  1. Aditya Bajaj Says:

    तेरा सर था मेरे कंधे, दिल किसी की बांह में,
    ख्याल आया फिर, क्यूँ न तेरी दोस्ती मांग लें |

    Ultimate writing...
    Great Poetry !
    सोचता हूँ थोड़ी मुहब्बत, पतझड़ से ही मांग लें |
    waah kya baat hai..

    ek ek sher me dam hai...
    khoob !


  2. thanks, just a small effort


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