नज़्म : मैं

मेरा हर सफ़र है शुरू वहीँ से,
मैं जहाँ से जब कभी चल रहा हूँ |

बड़ी धूप है ज़रा ठहरने तो दो,
शक है, मैं ज़रा-ज़रा गल रहा हूँ |

तूफान तो आने ही थे, है खबर,
आज मैं जो फिर से सम्हल रहा हूँ |

मुझे रोकने की गुस्ताखी न करना,
मैं आजकल जोर से जल रहा हूँ |

कोई छीन ले तो चैन देना न उसको,
चैन खो कर मैं धीरे धीरे ढल रहा हूँ |

ऐ खुदा, मैं क्यूँ तेरी राह पे भी, 
शैतानों सा ही मचल रहा हूँ|


मुझे  दोस्तों का साथ गवारा नहीं,
मैं अकेला ही जी आजकल रहा हूँ |

'अतुल'

2 Responses

  1. अतुल जी आप आये बहार आयी
    अब स्वास्थ कैसा है आपका

    आप तो हमें भूल ही गए


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